| हवाओ का कुछ असर है की आज मौसम खुशनुमा है एक अजीब सी शरारत है आज फिजाओ में भी कभी लम्हों का भी कुछ सलीका होता है जिंदगी की नफासत सिखलाने का और कुछ नया बतलाने का कभी मिल जाते हैं यु ही अक्सर रह चलते मुसाफिर तो कभी अपनापन नही मिल पाताअपनों में भी कभी शरियत से दूर भी खुदा की इबादत होती है कभी मस्जिद में जाके भी नमाज का मुका छुट जाता है कभी परयो में भी अपने मिल जाते हैं इस कदर की उपर वाले की रहमत में सुकून नजर आता है कभी गुमनामी में पसरे अंधेरो से भी आती है एक रोशनी कभी उजालो में भी सर छुपाये रहते हैं हम कभी दिल की बाते बताने में लग जाते हैं सालो कभी इश्क घर बैठे हो जाता है कभी हर बात में रंजो गम की तफसील होती है कभी इशारो में भी इश्क परवान चढ़ जाता है वह रे खुदा क्या दुनिया बनाई है तुने गजब की कभी दूर लगता है तू तो कभी दिल में मक्का मदीना नजर आता है |
Wednesday, October 28, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment