Saturday, November 21, 2009

मेरी कहानी सुनो
मैं यही तो हु
तुम्हारे आस पास
तुम्हारे दिए हु उतरन
के सहारे जीने वाला
सर्दी की रातो को
फूटपाथ पे सो के गुजरने वाला
कभी तुम्हारे घर से मिले
तो ठीक वरना भूखे सोने वाला
वही छोटू
वही गन्दा सा बच्चा
जिसे एक बार हिमाकत की थी
तुम्हारे बच्चो के साथ खेलने की
और तुमने मुझे दूर भगाया था
अपने बच्चों को बचाया था
बचाया था मेरी गन्दगी से
मेरे मैले हाथो की चुआन से

अभी कल रत की ही तो बात ही
एक शराबी ने
पीता मुझे बहुत रात को
और तुमने मुझे बचाया था
मेरी इस अदद जिंदगानी पे
एक अहसान फ़रमाया था

मुझे तो ये भी नही पता
कौन है मेरी माँ
कौन है मेरा बापू
मैं तो तुममे ही देखता रहा
अपने पालनहारे
तुम्हारे घर के सामने ही तो आंखे खोली
यही एक दिन मर जाना है

बस गम है इस बात का की
काश मेरा भी घर होता
मैं भी माँ की गोदी में सोता
मेरे भी सपने होते
मैं भी अच्छा कपड़े पहन के स्कूल जाता
अपने बापू से मैं भी प्यार पाटा
पैर सरे अपने पुरे होने के लिए नही होते
अच्छा है मैली आँखों में सपने नही hote

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