Sunday, November 29, 2009

अक्सर रह चलते मिल जाते हैं
कुछ मुसाफिर
वैसे तो वो अपने नही होते
पैर अपने होते भी कहा है

ठीक ही तो कहा है कहने वाले ने
की डगर मुश्किल है
दूर बहुत मंजिल है
पैर किसी पे तो विश्वास करना है
किसी को तो अपना कहना है

कोई अपना होके भी साथ छोड़ देता है
कोई पराया भी अपना होता है
कभी दुःख में कभी सुख में
कभी कठिनायों के भंवर में
वो ही साथ निभाते है
जो इस राह में पराये कहलाते हैं'

केवल कुछ शब्द ही नही होते
अभिव्यक्ति भावो की
कभी तो दिल की तरंग पे
कोई साज बजाएगा
अपना नही तो क्या
कोई पराया ही साथ nibhayega

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