अक्सर रह चलते मिल जाते हैं
कुछ मुसाफिर
वैसे तो वो अपने नही होते
पैर अपने होते भी कहा है
ठीक ही तो कहा है कहने वाले ने
की डगर मुश्किल है
दूर बहुत मंजिल है
पैर किसी पे तो विश्वास करना है
किसी को तो अपना कहना है
कोई अपना होके भी साथ छोड़ देता है
कोई पराया भी अपना होता है
कभी दुःख में कभी सुख में
कभी कठिनायों के भंवर में
वो ही साथ निभाते है
जो इस राह में पराये कहलाते हैं'
केवल कुछ शब्द ही नही होते
अभिव्यक्ति भावो की
कभी तो दिल की तरंग पे
कोई साज बजाएगा
अपना नही तो क्या
कोई पराया ही साथ nibhayega
Sunday, November 29, 2009
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