Tuesday, December 1, 2009

आज बुखार में ताप रहा बदन
कहना चाह रहा कुछ
इसे भी कुछ विश्राम चाहिए
इस भाग दौड़ की दुनिया से
आराम चाहिए।

कभी तो हमे समय की कमी
पुरी होती नही
न ही कभी ठौर मिलता है
जिंदगी की हसीं यादो को
भुला बैठे है
जिन्होंने साथ छोड़ना था छोड़ दिया
अब कहा कोई अपना और मिलता है

नस नस में उठते दर्द से
रह रह के उठती तक बात
कुछ जवाब मांग रही हैं ये
कुछ छुपे हुए सवालात

आज बदन का रोम रोम
दर्द से पुकारता
की हमे विश्राम चाहिए
इस भाग दौड़ की जिंदगानी से
एक अदद आराम chahiye

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