| आज बुखार में ताप रहा बदन कहना चाह रहा कुछ इसे भी कुछ विश्राम चाहिए इस भाग दौड़ की दुनिया से आराम चाहिए। कभी तो हमे समय की कमी पुरी होती नही न ही कभी ठौर मिलता है जिंदगी की हसीं यादो को भुला बैठे है जिन्होंने साथ छोड़ना था छोड़ दिया अब कहा कोई अपना और मिलता है नस नस में उठते दर्द से रह रह के उठती तक बात कुछ जवाब मांग रही हैं ये कुछ छुपे हुए सवालात आज बदन का रोम रोम दर्द से पुकारता की हमे विश्राम चाहिए इस भाग दौड़ की जिंदगानी से एक अदद आराम chahiye |
Tuesday, December 1, 2009
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