Wednesday, December 16, 2009

कौन खुश hai

बारिश की गिरती हुई
बिन्दो के बीच चाय की चुस्कियों का
मजा ही कुछ और है
अपने आठवी मंजिल के फ्लैट स
देखता हु सामने कुछ मजदूरो को
गित्तिया उठातेहुए
आपस में बतियाते हुए
कुछ गप शाप लड़ाते हुए
और बारिश के बीचा चाय की
चुस्किया लेते हुए

तभी मेरे दिमाग में ख्याल आता ही
की किसकी चाय में ज्यादा मजा होगा
मेरे और नीचे बैठे उन मजदूरो में
कौन ज्यादा खुश होगा

मैं तो कमाता हु लाखो में
इन मजदूरो की तो औकात ही क्या है
ये कुछ सो सौरूपये में आते हें
न इनके पास फ्लैट है ये तो
जमीन पे भी सो जाते हें
न ही इनके पास कार है
ये तो साइकिल स ही काम पे जाते हें

पैर तभी मेरे बोसे का फ़ोन आया
उसने मुझे तभी ऑफिस बुलाया
मेरे मुह स चाय छुट गयी
और मैंने दफ्तर जाने का प्लान बनाया

आज तो लगता है रात दफ्तर में ही
बितानी है
काम के बोझ स जिंदगी नरक बन जानी है
जैसे ही घर स बहार निकालता हु
देखता हु अभी भी उन मजदूरो को
आपस में बतियाते हुए
गप्पे लड़ाआते हुए
चाय की चुस्कियों का मजा लेते हुए।


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