Monday, November 23, 2009

वो दोनों सदा ही आते हैं
अक्सर साथ दिख जाते हैं
कभी देखा नही उनको लड़ते हुए
झगड़ते हुए
कैसे आख़िर एक लड़का और लड़की
इतने प्रेम,स्नेह से रह सकते हैं
इस इर्ष्या,घृणा और नफरत से भरी
दुनिया में
जहा अपने भी साथ नही निभाते
तो परयो से तो उम्मीद ही बेमानी है
मैंने जब भी देखा
उनको साथ खाना खाते हुए
एक दुसरे की चिंता में
ररातें जाग के बिताते हुये
देखते हुए साथ में सपने
खुली आँखों से
करते हुए प्यार की बारिश एक दूजे पे
साडी दुनिया से बेखबर
कभी नही देखा उनकी आँखों में
कोई चिंता का साया
कभी उनके चेहरे पे न
शिकन देखि मैंने

हा कभी आते जाते रसते में लोग
उनपे चिल्लाते हैं
उनको पठारों से दूर भगाते हैं
उनको गलिया सुनते हैं

शायद मैं भूल गया
अच्छे खासे इंसान ही
आज की दुनिया में
पागल पगली कहलाते हैं

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