Wednesday, October 7, 2009

जर्रा जर्रा संवाद करे
रह रह कर तुझको याद करे
तेरे उस भोलेपन को जालिम
मिलने के ये फरियाद करे
कब उस निश्चल हँसी को पायेगा
ये दिन गिन गिन के रात करे
तेरी एक छवि सुहानी पाने को
ये रह रह कर फरियाद करे

तू अति सुंदर रूकी मालिक है
ये तेरे हुस्न का प्यासा है
तू कोमलांगी मृगनयनी है
इस दिल को तेरी अभ्लाषा है
जाने कब वो दिन आएगा
जब तू मेरे जीवन में आएगी
तू मेरी इस सुनसान जिंदगी में
सावन की रिम झिम लाएगी

मैं तेरी पूजा करता हु
दिन रात आहे भरता हु
तुझमे अपना भगवान् बसा के
तेरी तस्वीर मदिर में रखता हु

कब ख़तम होगा मेरा ये इन्तेजार कठिन
तू कब मुझसे मिलेगी और
कब मेरी तमन्ना पुरी होगी
कब तू मुझसे शर्माएगी
ये इन्तेजार तो काफ़ी हु
कब मिलने की रुत आएगी


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