| जर्रा जर्रा संवाद करे रह रह कर तुझको याद करे तेरे उस भोलेपन को जालिम मिलने के ये फरियाद करे कब उस निश्चल हँसी को पायेगा ये दिन गिन गिन के रात करे तेरी एक छवि सुहानी पाने को ये रह रह कर फरियाद करे तू अति सुंदर रूकी मालिक है ये तेरे हुस्न का प्यासा है तू कोमलांगी मृगनयनी है इस दिल को तेरी अभ्लाषा है जाने कब वो दिन आएगा जब तू मेरे जीवन में आएगी तू मेरी इस सुनसान जिंदगी में सावन की रिम झिम लाएगी मैं तेरी पूजा करता हु दिन रात आहे भरता हु तुझमे अपना भगवान् बसा के तेरी तस्वीर मदिर में रखता हु कब ख़तम होगा मेरा ये इन्तेजार कठिन तू कब मुझसे मिलेगी और कब मेरी तमन्ना पुरी होगी कब तू मुझसे शर्माएगी ये इन्तेजार तो काफ़ी हु कब मिलने की रुत आएगी |
Wednesday, October 7, 2009
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