बारिश की बूंदों में खेलते
बच्चो की किल्कारिया
कितनी खुश औरमासूम है
जिंदगानी उनकी
न मन में कोई शिकवा
न कोई गिला किसी से
अपने में मस्त बसाये
रहते हैं अपनी छोटी सी दुनिया
ये बच्चे समझाते हैं हमे
इस जिंदगी का असली मतलब
असली मकसद
एक तरीका जिंदगानी बिताने का
हर चल फरेब से दूर ये बच्चे
हमे सलीका सीखते है
नफासत से जिंदगी बिताने का
ये देते है हमे सीख
की कैसे बिना दुसरो का बुरा किए
भी अच्छाई से नाता जोड़ा जाता है
कैसे घृणा इर्ष्या से दूर रह कर
ही प्रेम जिंदगी में आता है
कैसे कुछ त्याग करके मिलती
है खुसी अपार
इस छल कपट से परे भी
हो सकता है इक संसार
काश हर कोई बच्चा बन जाता
फ़िर दुनिया में न कोई दुखी रह पता
सब रहते अपने में मस्त
और न होते दुसरे की खुसी से ट्रस्ट
ये बच्चे भी कैसी बाते सिखलाते हैं
हमे जीने का सलीका बतलाते है
Wednesday, October 28, 2009
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काश कि हर कोइ बच्चा बन जाता .......वाह अद्भुत है जी ..बहुत सुंदर विचार और रचना है ..लिखते रहें
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