डाल से टुटा हुआ पत्ता उसकी मनो स्थिति भांपना कोई काम नहीं आसान हर पल वो सोच रहा होता है संघर्ष के लिए बिना चिंता किया क्या ह्या पूर्व में क्या खोया,क्या नहीं हो सका वो नहीं मरने देता अपने अंदर की जलती हु ज्वाला को नहीं विलोप होने देता है अपने सपनो को हर मन की यही है कहानी काश हम समझ सके पत्ते की जुबानी आशाये मर जाने पैर भी नहीं मरता उसके अंदर का जज्बा और वो कोशिश करता है अपना राह बनाने को अपना खोया हुआ अस्तित्व पाने ko |
Saturday, February 20, 2010
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