Wednesday, February 10, 2010

काश ना हो हर रात के बाद सवेरा
शायद कुछ जिन्दगानियो का
फलसफा येही होता है
ऐसे मिलने स तो ना मिलना अच्चा
जिसमे जुदाई का गम जुदा होता है

ऐसे ही नहीं बन जाते कुछ लोग
अपने खास
ये तो एक अहसास है जो
वक्त की कसौटी पे परख के आता है
वरना कहा इस जालिम जमाने में
कोई अपना बन जता है

जता देना सब कुछ एक बार में
हर बार हो नहीं पाटा
कुछ तो रहम-इ-दिल तो कुछ
ishq के aaine में नहीं
sambhal पाटा है

gar wajood होता aapni
tanhaiyo का तो
aksar wo hamaare saamne aa khadi hoti
aur hamaare rishto के darmiyan
बन jaati एक nayee hakeekat।

ऐसे ही chalti है jindgaani 'Panky'
Faslo का अहसास najdikiyo स
होता nahi

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