Sunday, February 14, 2010

हम बच्चे ही आगे आयेंगे

माँ मुझे बन्दुक दे दो
मुझे लड़ने जाना है
घर बैठ के नहीं देख सकती मैं
अपने लोगो को मरते हुए
इस तरह रोज रोज झगड़ते हुए

माँ बच्ची हु तो क्या हुआ
कम स कम अपने लोगो के
लिए ही कुछ कर जाउंगी
जब अपने बड़े आपस में झगड़ रहे
तो मैं ही देश बचाऊँगी

माँ कब तक यु ही रोज रोज
हम आपस में झगड़ेंगे
कब तक जात,पात ,जगह के नाम पैर
एक दुसरे का खून बहायेंगे
कब तक अपने ही लोगो में
भेदभाव फैलायेंगे

जब दुश्मन है तैयारी में
मेरी मातृभूमि कब्जाने में
और मेरे देश के बड़े लोग
व्यस्त हैं लोगो को बरगलाने में
तो अच्चा हो हम बच्चे ही
इस देश को बचायेंगे
गर बाकि लोग डरपोक है तो क्या
हम खुद का खून बहायेंगे

मैं मराठी हु,मैं कन्नड़ हु,
मैं तमिल भी हु,मैं तेलुगु हु,
मैं हु गुजराती,मैं हु बंगाली
मैं हु उड़िया मैं पैर सबसे पहले मैं
हु भारतवासी

इस देश को बनाने में
कितनो ने प्राण गवाए थे
और आज उसी धरती को माँ
हम आपस में ही बाँट रहे
अपनी भारत माता का अंचल
अपने खून स उजाड़ रहे

अब समय नहीं हैं बातो का
ये वक्त है कुछ कर जाने का
गर बड़े लड़ते रहे इस तरह
तो हम बच्चे ही आगे आयेंगे
इस देश को बचाने को
एक नयी क्रांति लायेंगे
अपनी भारत माता को
फिर स हम बचायेंगे

No comments:

Post a Comment