Friday, August 14, 2009

धुंध में एक साया



कभी अनजाना saa कभी पहचाना सा
बहुत दूर था कभी to
कभी मेरे बहुत करीबथा
वो धुंध में एक साया
क्यों चाह कर भी वोकः न सका मुझसेमेरे सबसे करीब होके भिदुर था मुझसे
मैंने महसूस की थीउसकी सांसो की गर्मिउसके अन्तेर्मन की कशिशुसके हाथो की नरमी
सुनाई देता था मुझेउसके दिल का धड्कनाख्वाहिश उसके बेपनाह चाहने किरुमनियत उसके नजदीक आने की
महसूस किया था सब मैनेबिना बोले बिना बताययूसकी हर नब्ज पढ़ी थी मैनेबिना कभी उसके जताए
मेरी अकेली रातो मुस्की आहत सुकून देती थिमेरी खामोश तनहइयो मुस्की झलक खुशिय्स भर देती थी
वो मेरी सांसो में था समयावो मेरे हर पल में साथ नजर आयौसकी यादो न कभी भुला पायथा वो धुंध में एक साया

4 comments:

  1. भाई हमारा भी ख्याल करें पढने के लिए magnifying लेंस लगाना पड़ेगा

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  2. चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

    कृप्या ये word verification हटा दें...टिप्प्णी करने में आसानी होती है

    गुलमोहर का फूल

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  3. आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
    लिखते रहिये
    चिटठा जगत मे आप का स्वागत है
    गार्गी

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