कभी अनजाना saa कभी पहचाना सा बहुत दूर था कभी to कभी मेरे बहुत करीबथा वो धुंध में एक साया क्यों चाह कर भी वोकः न सका मुझसेमेरे सबसे करीब होके भिदुर था मुझसे मैंने महसूस की थीउसकी सांसो की गर्मिउसके अन्तेर्मन की कशिशुसके हाथो की नरमी सुनाई देता था मुझेउसके दिल का धड्कनाख्वाहिश उसके बेपनाह चाहने किरुमनियत उसके नजदीक आने की महसूस किया था सब मैनेबिना बोले बिना बताययूसकी हर नब्ज पढ़ी थी मैनेबिना कभी उसके जताए मेरी अकेली रातो मुस्की आहत सुकून देती थिमेरी खामोश तनहइयो मुस्की झलक खुशिय्स भर देती थी वो मेरी सांसो में था समयावो मेरे हर पल में साथ नजर आयौसकी यादो न कभी भुला पायथा वो धुंध में एक साया |
Friday, August 14, 2009
धुंध में एक साया
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भाई हमारा भी ख्याल करें पढने के लिए magnifying लेंस लगाना पड़ेगा
ReplyDeleteचिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.
ReplyDeleteकृप्या ये word verification हटा दें...टिप्प्णी करने में आसानी होती है
गुलमोहर का फूल
age age dekhiye hota hai kya?
ReplyDeleteआप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
ReplyDeleteलिखते रहिये
चिटठा जगत मे आप का स्वागत है
गार्गी