| आज के साये में कल छुप के आता है कभी सामने तो कभी पीछे से नए नए करतब दिखता है मनुष्य तो केवल एक मध्यम मात्र है ये तो समय ही है जो उसे अपनी उंगलियों पे नचाता है गुजरे हुए कल की कुछ अनछुई सी कविताये लेकर आने वाले पले से पहले उनका बिम्ब दिखाता है ये सबसे बड़ा आलोचक है जो आपकी हर कृति पे अपनी चाप छोड़ जाता है कभी अहसास से तो कभी अभ्यास से नए नए अध्याय सिखाता है ये आपके हर पल में भागीदार है और आपकी हर परेशानी में साझेदार है बिना आपका हाथ थामे भी ये हर कठिनाई में मदद गार ही ये तो मनु की परवर्ती ही ही ऐसी की वो इच्छाओं के दामन में फंस कर भूल जाता ही वो सुख की घडिया और उसे दुर्भाग्य समझता ही अन्यथा समय तो हमेशा सौभाग्य ही बनकर आता है |
Friday, August 28, 2009
samay
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