| वो दूर गगन में उड़ते पंची वो घर जाते गायो के झुंडवो किलकारी मरते बच्चो के रेले वो रात भर सुनना माँ की लोरी वो पनघट पे जाती नौव्युव्तियावो खेतो से आते नौजवान वो भोर के सूरज की लाली संग दूर किसी मस्जिद की अजान वो सावन के झूलो का लगना वो बारिश की बूदों का गिरना वो माँ के अंचल में चुप जानाऔर रस्ते में भागते धुल उडाना वो बूढी दादी की कहानिया वो बिल्ली के प्यारे से बच्चे रह गया सब कुछ itnaaपीछे मेरा मन मुझसे आज भी पुच्छे क्यों आगे बढ़ना छोड़ देता है बचपन की सुहानी यादो को क्यों अपने अतीत की कहानियो को सेज के रखते हैं हम क्या उनका वजूद है केवल सुनाये जाना एक पीढी से दूसरी पीढी को क्यों पराये हो जाते है हम इतनी जल्दी अपनी माट्टी से क्यों खो जाते हैं अपनी इस दुनिया में जिसका कोई अस्तित्व नहीं . |
Sunday, August 30, 2009
क्यों
Friday, August 28, 2009
samay
| आज के साये में कल छुप के आता है कभी सामने तो कभी पीछे से नए नए करतब दिखता है मनुष्य तो केवल एक मध्यम मात्र है ये तो समय ही है जो उसे अपनी उंगलियों पे नचाता है गुजरे हुए कल की कुछ अनछुई सी कविताये लेकर आने वाले पले से पहले उनका बिम्ब दिखाता है ये सबसे बड़ा आलोचक है जो आपकी हर कृति पे अपनी चाप छोड़ जाता है कभी अहसास से तो कभी अभ्यास से नए नए अध्याय सिखाता है ये आपके हर पल में भागीदार है और आपकी हर परेशानी में साझेदार है बिना आपका हाथ थामे भी ये हर कठिनाई में मदद गार ही ये तो मनु की परवर्ती ही ही ऐसी की वो इच्छाओं के दामन में फंस कर भूल जाता ही वो सुख की घडिया और उसे दुर्भाग्य समझता ही अन्यथा समय तो हमेशा सौभाग्य ही बनकर आता है |
इसको क्या नाम दू ?
जलालत भी मिले दर पे उसकी तो क्या
सुकून दीदार-ए-यार तो मिल जायेगा
वो मजबूरी को गैरत समझे तो क्या
उनका अल्फाज तो कानो में जायेगा
हम बेकदरी का देके इम्तिहान भी
न उनको प् सके तो क्या
इस बहाने उनके जेहन में हमारा ख्याल तो आएगा
हमारी बेपनाह मुहब्बत को जेल किया सरे आम तो क्या
इसी बहाने उनका बेपनाह हुस्न तो नजर आएगा
हम इश्क के इम्तिहान में बजी न मार सके तो
क्याहमारा नाम तो आशिको में गिना जाएगा
जीते जी न उनको प् सके तो क्या
मरने के बाद भी हमारी कब्र पे उनके नाम का फातिहा तो पढ़ा जायेगा
सुकून दीदार-ए-यार तो मिल जायेगा
वो मजबूरी को गैरत समझे तो क्या
उनका अल्फाज तो कानो में जायेगा
हम बेकदरी का देके इम्तिहान भी
न उनको प् सके तो क्या
इस बहाने उनके जेहन में हमारा ख्याल तो आएगा
हमारी बेपनाह मुहब्बत को जेल किया सरे आम तो क्या
इसी बहाने उनका बेपनाह हुस्न तो नजर आएगा
हम इश्क के इम्तिहान में बजी न मार सके तो
क्याहमारा नाम तो आशिको में गिना जाएगा
जीते जी न उनको प् सके तो क्या
मरने के बाद भी हमारी कब्र पे उनके नाम का फातिहा तो पढ़ा जायेगा
रोशनी
| हर सुबह प्रकाश से तर हो ज्यूँ निकले रोशनी चारो दिशाओ को प्रफुल्लित कर रही ज्यूँ रोशनी कभी गम के अँधेरे में कभी दुखो के साये में कभी अपने अहसासों में खो रही ज्यूँ रोशनी कभी अपनों से दूर हो के कभी सपनो से दूर हो के अपनी आशाओं को जलाकर आ रही ज्यूँ रोशनी बिना थके बिना रुके स्वयं की न परवाह किये दूजो की चिंता में मनो जल रही यु रोशनी है कोई न तुझसा आत्मा के दीपक दुसरो के हित में लगाये निरंतर धर्म का अपना पालनकर रही यु रोशनी |
Friday, August 14, 2009
धुंध में एक साया
कभी अनजाना saa कभी पहचाना सा बहुत दूर था कभी to कभी मेरे बहुत करीबथा वो धुंध में एक साया क्यों चाह कर भी वोकः न सका मुझसेमेरे सबसे करीब होके भिदुर था मुझसे मैंने महसूस की थीउसकी सांसो की गर्मिउसके अन्तेर्मन की कशिशुसके हाथो की नरमी सुनाई देता था मुझेउसके दिल का धड्कनाख्वाहिश उसके बेपनाह चाहने किरुमनियत उसके नजदीक आने की महसूस किया था सब मैनेबिना बोले बिना बताययूसकी हर नब्ज पढ़ी थी मैनेबिना कभी उसके जताए मेरी अकेली रातो मुस्की आहत सुकून देती थिमेरी खामोश तनहइयो मुस्की झलक खुशिय्स भर देती थी वो मेरी सांसो में था समयावो मेरे हर पल में साथ नजर आयौसकी यादो न कभी भुला पायथा वो धुंध में एक साया |
Sunday, August 9, 2009
कभी to
| कभी तो तेरे दिल में भीकुछ हुआ होगा कभी तो तुझे भी तनहइयो ने छुआ होगा लोगो ने तो मुझे ही पत्थर मारेऔर मुझे पागल कहाकभी तो तुने भी अपने प्यार का पागलपन महसूस किया होगा कभी तो तू भिरोयी होगी अकेले मेकभी तो तुने भी मेरेख्बाब संजोये होंगे कभी तो तुने भी मेरी तस्विर्सिर्हने राखी होगीऔर कभी तो तुने भी मेरे नामकी मन्नत मांगी होगी या मैं ही तुझे न पाने के गम में यु घूमता रहतुझे पाने की खातिर हर मन्दिर का डर चूमता रहा हर पल तेरी यादो के सजदे में जिया और हर पल तुझे में हिराब का दीदार किया फ़िर तुने क्यों मेरी तनहइयो को मेरी तंगहाली से जोदौर मेरे उस पाकीजा प्यार कोइस तरह छोड़ा पैर मैंने तो जिंदगी तेरे नाम की हैआज चाहे अका ही इस जहा को अन्तिम सलाम फार्म रहा हुतेरा साथ तो मुझे न मिल पाया इस जिंदगी मेपेर तेरी यादो के साथ ही कब्र में दफनाया जा रहा हु |
मेरा aashiyana
कब्रों के मजमे में बैठा हूँ,
कहीं से कोईं आवाज़ नहीं आती
मैं दर्द किससे कहूं अपना
मुर्दों के समझ कोई बात नहीं आती
गम का एहसास तो जिंदा-दिलों को होता है
लाशों से क्या फरियाद करू मैं
अब तो खामोशी ही है साथी मेरी
खामोशी ही अच्छी है
कम से कम गम में साथ तो देती है
वरना जिन्दा लाशों के शहर में तो मौत का साया मंडराता है
जिन्दा अक्सों में भी मुर्दों सा सकूं नज़र आता है
कोई जिल्लत को जिंदगी समझ जिए जाता है
कोई फरेब की मौत को गले लगता है
कोई करता है अपनी गद्दारी पे गुमान तो
कोई अपने उसूलो को तक पे रख के सो जाता है
मैं तो आज इस कब्रिस्तान में ही खुश हु
मेरे साथ रोते नही तो क्या
मुझसे हमदर्दी तो जताते हैं
ये मुर्दे जीते जी नही तो क्या
मरने के बाद तो साथ निभाते हैं
कहीं से कोईं आवाज़ नहीं आती
मैं दर्द किससे कहूं अपना
मुर्दों के समझ कोई बात नहीं आती
गम का एहसास तो जिंदा-दिलों को होता है
लाशों से क्या फरियाद करू मैं
अब तो खामोशी ही है साथी मेरी
खामोशी ही अच्छी है
कम से कम गम में साथ तो देती है
वरना जिन्दा लाशों के शहर में तो मौत का साया मंडराता है
जिन्दा अक्सों में भी मुर्दों सा सकूं नज़र आता है
कोई जिल्लत को जिंदगी समझ जिए जाता है
कोई फरेब की मौत को गले लगता है
कोई करता है अपनी गद्दारी पे गुमान तो
कोई अपने उसूलो को तक पे रख के सो जाता है
मैं तो आज इस कब्रिस्तान में ही खुश हु
मेरे साथ रोते नही तो क्या
मुझसे हमदर्दी तो जताते हैं
ये मुर्दे जीते जी नही तो क्या
मरने के बाद तो साथ निभाते हैं
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