Sunday, November 29, 2009

अक्सर रह चलते मिल जाते हैं
कुछ मुसाफिर
वैसे तो वो अपने नही होते
पैर अपने होते भी कहा है

ठीक ही तो कहा है कहने वाले ने
की डगर मुश्किल है
दूर बहुत मंजिल है
पैर किसी पे तो विश्वास करना है
किसी को तो अपना कहना है

कोई अपना होके भी साथ छोड़ देता है
कोई पराया भी अपना होता है
कभी दुःख में कभी सुख में
कभी कठिनायों के भंवर में
वो ही साथ निभाते है
जो इस राह में पराये कहलाते हैं'

केवल कुछ शब्द ही नही होते
अभिव्यक्ति भावो की
कभी तो दिल की तरंग पे
कोई साज बजाएगा
अपना नही तो क्या
कोई पराया ही साथ nibhayega

Monday, November 23, 2009

वो दोनों सदा ही आते हैं
अक्सर साथ दिख जाते हैं
कभी देखा नही उनको लड़ते हुए
झगड़ते हुए
कैसे आख़िर एक लड़का और लड़की
इतने प्रेम,स्नेह से रह सकते हैं
इस इर्ष्या,घृणा और नफरत से भरी
दुनिया में
जहा अपने भी साथ नही निभाते
तो परयो से तो उम्मीद ही बेमानी है
मैंने जब भी देखा
उनको साथ खाना खाते हुए
एक दुसरे की चिंता में
ररातें जाग के बिताते हुये
देखते हुए साथ में सपने
खुली आँखों से
करते हुए प्यार की बारिश एक दूजे पे
साडी दुनिया से बेखबर
कभी नही देखा उनकी आँखों में
कोई चिंता का साया
कभी उनके चेहरे पे न
शिकन देखि मैंने

हा कभी आते जाते रसते में लोग
उनपे चिल्लाते हैं
उनको पठारों से दूर भगाते हैं
उनको गलिया सुनते हैं

शायद मैं भूल गया
अच्छे खासे इंसान ही
आज की दुनिया में
पागल पगली कहलाते हैं

Saturday, November 21, 2009

मेरी कहानी सुनो
मैं यही तो हु
तुम्हारे आस पास
तुम्हारे दिए हु उतरन
के सहारे जीने वाला
सर्दी की रातो को
फूटपाथ पे सो के गुजरने वाला
कभी तुम्हारे घर से मिले
तो ठीक वरना भूखे सोने वाला
वही छोटू
वही गन्दा सा बच्चा
जिसे एक बार हिमाकत की थी
तुम्हारे बच्चो के साथ खेलने की
और तुमने मुझे दूर भगाया था
अपने बच्चों को बचाया था
बचाया था मेरी गन्दगी से
मेरे मैले हाथो की चुआन से

अभी कल रत की ही तो बात ही
एक शराबी ने
पीता मुझे बहुत रात को
और तुमने मुझे बचाया था
मेरी इस अदद जिंदगानी पे
एक अहसान फ़रमाया था

मुझे तो ये भी नही पता
कौन है मेरी माँ
कौन है मेरा बापू
मैं तो तुममे ही देखता रहा
अपने पालनहारे
तुम्हारे घर के सामने ही तो आंखे खोली
यही एक दिन मर जाना है

बस गम है इस बात का की
काश मेरा भी घर होता
मैं भी माँ की गोदी में सोता
मेरे भी सपने होते
मैं भी अच्छा कपड़े पहन के स्कूल जाता
अपने बापू से मैं भी प्यार पाटा
पैर सरे अपने पुरे होने के लिए नही होते
अच्छा है मैली आँखों में सपने नही hote