अब के जो होली आएगी मैं रंग तेरे रंग जाउंगी सब छोड़ छाड़ के दीं धरम मैं तुझ में ही बस जाउंगी
कोई डाले चाहे कैसे भी रंग मैं तेरा रंग लगाउंगी लाल हो या गुलाल हो वो मैं प्यार का रंग सजाऊँगी
कब से तरस रहे मेरे ये नैना तेरे दर्शन को अब के जो फागुन आएगा मैं तेरी मूरत पाउंगी सावन के झूले रीते बीते मैं इस बार फाग का रंग लगाउंगी अबके जो होली आएगी मैं तुझमे रच बस जाउंगी
अब नहीं मुझे कोई चिंता ये दुनिया क्या क्या सोचेगी मैंने तुझको प्रियवर माना है अब लाज शर्म की बात नहीं मेरी नहीं कोई लालसा अब मैं तेरे साथ ही जाउंगी अब के जो होली आएगी मैं तेरा रंग लगाउंगी
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होली पर आपको अनेक शुभकामनाएं
ReplyDeleteउदकक्ष्वेड़िका … यानी बुंदेलखंड में होली