आज मैं फिर से जाग गया हु
अपने शोर्य को पहचान लिया है
फिर से मेरी उंगलियों ने मुट्ठी का रूप ले लिया है
और मेरी बाजुए फड़कने लगी हैं
आज फिर मेरे माथे की शिकन ने चिंतन का रूप लिया है
आज फिर मेरे अंडर धधकती प्रितिशोध की ज्वाला जल उठी है
आज फिर मेरे पैरो की छाप लगने वाली है
अब न कोई रात अमावस सी काली है
आज फिर मेरे शौर्य की गाथाये जमाना जायेगा
अब फिर से एक नया इतिहास लिखा जायेगा
अब फिर कोई अत्याचारी न जुल्म ढहा पायेगा
अब न फिर कोई कंश बन पायेगा
लाओ मुझे दे दो मेरे अस्त्र शास्त्र
पहना दो मुझे रन की पोशाक
मेरे फड़कते बाजुओ में थमा दो तलवार
अब दुनिया सुनेगी इसकी टंकार
अब मैं ना अपनी भावनाओ को हावी होने दूंगा
अब मैं युध को युध्ध की तरह से लडूंगा
आब न कोई मुझको हरा पायेगा
अब न कोई मेरी होते हुए मेरी धरा को रौंद पायेगा
अब जब तक मेरे सर पे मुकुट
धड पे सर है
तब तक न कोई नापाक इरादा इसको जमींदोज कर पायेगा
अब मेरी लाश ही मुझे मेरे इरादों से डिगा पायेगी
या तो मिटा दूंगा हर आततायी को या मेरी लाश बिच जायेगी
कर दो मेरे माथे पे तिलक मेरे रन की घडी आई है
अब नीद से जाग गया मैं
मेरी मातृभूमि ने मुझे फिर से आवाज लगाई है
Sunday, September 6, 2009
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waah atisundar ......bahut hi sundar bhaw our jajbaa ko salaam
ReplyDeleteOj se paripurn rachna.Shubkamnayen.
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